
![]()
सुपरहीरो केवल कॉमिक्स के पन्नों में नहीं होते। कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी हमें बताती है कि संकट के समय साहस और कर्तव्य की भावना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। (Superheroes don’t exist only in comic books. Captain Smit Machhar’s courage reminds us that, in a crisis, courage and a sense of duty can become a person’s greatest strength.)
कॉमिक्स बाइट पर हम हमेशा सुपरहीरोज़ की बात करते हैं। सुपरमैन, बैटमैन, स्पाइडर-मैन, आयरन मैन से लेकर भारत के अपने चाचा चौधरी, साबू, नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, डोगा, परमाणु और शक्तिमान तक। लेकिन कभी हमने यह सोचने की कोशिश की है कि आखिर सुपरहीरो होता कौन है?

क्या सुपरहीरो वही है जिसके पास असाधारण शक्तियाँ हों? क्या उसके पास उड़ने की क्षमता होनी चाहिए? क्या उसके पास कोई रहस्यमयी शक्ति, कोई अद्भुत हथियार या कोई ऐसी ताकत होनी चाहिए जो एक सामान्य इंसान के पास नहीं होती?
शायद नहीं।
क्योंकि सुपरहीरो केवल एक काल्पनिक पात्र नहीं है। सुपरहीरो एक विचार है।
एक लेखक और रचनाकार किसी पात्र को जन्म देता है। उसके लिए एक कहानी लिखता है, उसकी पृष्ठभूमि बनाता है और उसके सामने एक ऐसी दुनिया रखता है जहाँ अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष चलता है। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो जाए, हमारा नायक उसके सामने खड़ा होता है।
कभी सामने कोई महाखलनायक होता है। कभी अपराध की दुनिया। कभी आतंकवाद। कभी माफिया। कभी कोई रहस्यमयी शक्ति। कभी कोई एलियन। खतरा कोई भी हो सकता है, लेकिन सुपरहीरो का मूल विचार वही रहता है: जब दूसरे पीछे हटें, तब कोई आगे आए।
इसीलिए हमारे लिए सुपरमैन केवल उड़ने वाला व्यक्ति नहीं है। बैटमैन केवल एक मुखौटा पहनने वाला व्यक्ति नहीं है। स्पाइडर-मैन केवल दीवारों पर चढ़ने वाला युवक नहीं है।
वे उन मूल्यों के प्रतीक हैं जिन पर हम विश्वास करना चाहते हैं। और भारत में भी हमारे अपने सुपरहीरोज़ इसी विचार को आगे बढ़ाते हैं।
चाचा चौधरी और साबू हों, नागराज हों, सुपर कमांडो ध्रुव हों, डोगा हों या परमाणु, इनकी कहानियों में बुराई के सामने खड़े होने का विचार हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। शक्तिमान भी अंधकार और बुराई के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक रहा है।
लेकिन फिर एक सवाल आता है –
क्या सुपरहीरो केवल कॉमिक्स के पन्नों में होते हैं?
शायद नहीं।
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में जो हुआ, उसने इस सवाल का जवाब हमारे सामने एक बार फिर रख दिया।
इस उड़ान के भारतीय कप्तान स्मित मछार पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर हमला किया। स्मित मछार गंभीर रूप से घायल हुए। इसी दौरान विमान लगभग 14,000 फीट नीचे चला गया और स्थिति बेहद गंभीर हो गई। विमान में 174 लोग सवार थे।

ऐसी परिस्थिति में कोई भी इंसान घबरा सकता था। लेकिन स्मित मछार ने वह किया जो उस समय करना जरूरी था।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अंदर पहुँचकर हमलावर सह-पायलट को काबू करने का अवसर मिला। विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने नियंत्रण संभाला और आखिरकार विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित रूप से उतारा गया।
यहाँ एक बात समझना बहुत जरूरी है।
यह केवल स्मित मछार की कहानी नहीं है।
उस विमान में मौजूद यात्रियों ने भी साहस दिखाया। चालक दल ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। विमान में मौजूद अन्य लोगों ने भी संकट की घड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन इस पूरी घटना की शुरुआत उस निर्णय से हुई, जब गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
और यहीं पर कॉमिक्स बाइट के लिए यह घटना एक अलग अर्थ ले लेती है।शक्योंकि हम काल्पनिक सुपरहीरोज़ की कहानियाँ पढ़ते हैं, लेकिन स्मित मछार कोई काल्पनिक पात्र नहीं हैं।
उनके पास कोई अलौकिक शक्ति नहीं थी।
उनके पास कोई जादुई हथियार नहीं था।
उनके पास था अनुभव, प्रशिक्षण, साहस, सूझबूझ और अपने कर्तव्य के प्रति जिम्मेदारी।
यही तो असली शक्ति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान स्मित मछार ने बताया कि उस कठिन समय में भी वह हनुमान चालीसा का जाप कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें दर्द होता है तो वह हनुमान चालीसा का जाप करते हैं और उस समय भी उनके मन में यही चल रहा था।
उनकी यह बात उनकी व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा है। लेकिन उस पूरी घटना में जो बात सबसे ज्यादा सामने आती है, वह है संकट के बीच उनकी सूझबूझ और अपने कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण।
सुपरहीरो होने का मतलब यह नहीं कि आपको डर नहीं लगता। सुपरहीरो होने का मतलब यह भी नहीं कि आपको दर्द महसूस नहीं होता।
कई बार असली साहस यह होता है कि डर और दर्द दोनों के बावजूद आप वह काम करें जो उस समय करना जरूरी है।
कॉमिक्स में हमारा नायक घायल होता है। उसके सामने उससे कई गुना शक्तिशाली खलनायक खड़ा होता है। वह जानता है कि अगला कदम उसके लिए खतरनाक हो सकता है, लेकिन फिर भी वह उठता है।
क्यों?
क्योंकि उसके पीछे केवल उसकी अपनी जिंदगी नहीं होती।
उसके पीछे उन लोगों की जिंदगी होती है जिन्हें वह बचाना चाहता है।
और यही बात हमें स्मित मछार की घटना में दिखाई देती है।
उनके सामने कोई काल्पनिक महाखलनायक नहीं था। कोई रंग-बिरंगा परिधान नहीं था। कोई अलौकिक शक्ति नहीं थी।
वहाँ था एक वास्तविक संकट।
एक वास्तविक विमान।
174 वास्तविक जिंदगियाँ।
और एक इंसान, जिसने उस संकट के बीच अपना कर्तव्य निभाया।
इसीलिए जब हम आज सुपरहीरो की बात करते हैं तो हमें अपनी परिभाषा थोड़ी और बड़ी करनी चाहिए।
सुपरहीरो वह नहीं है जिसके पास सबसे ज्यादा शक्ति हो। सुपरहीरो वह भी हो सकता है जिसके पास कोई शक्ति नहीं, लेकिन जब दूसरों की जिंदगी खतरे में हो तो वह पीछे नहीं हटता।
हमारे देश ने ऐसे साहस की कहानियाँ पहले भी देखी हैं।
नीरजा भनोट का नाम आज भी भारतीय विमानन इतिहास में साहस और बलिदान के साथ लिया जाता है। और आज, दशकों बाद, स्मित मछार की घटना ने एक बार फिर हमें याद दिलाया है कि साहस किसी काल्पनिक दुनिया की चीज नहीं है।
वह हमारे बीच मौजूद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मित मछार की बहादुरी और सूझबूझ की सराहना की है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनके साहस की प्रशंसा की है।
लेकिन हमारे लिए स्मित मछार की कहानी का महत्व किसी प्रशंसा से कहीं बड़ा है।
क्योंकि कॉमिक्स बाइट उन कहानियों के बारे में बात करता है जिनमें अच्छाई बुराई के सामने खड़ी होती है। और जब वास्तविक दुनिया में कोई इंसान संकट के सामने खड़ा होता है, तब उस कहानी को भी याद किया जाना चाहिए।
कभी वह सुपरमैन होता है, कभी बैटमैन, तो कभी नागराज।
और कभी वह हमारे बीच का एक बिल्कुल सामान्य इंसान होता है, जो किसी कॉमिक्स का पात्र नहीं है, लेकिन अपने एक फैसले से सैकड़ों जिंदगियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्मित मछार ने हमें यही याद दिलाया है कि असली सुपरपावर क्या होती है। वह है संकट में भी अपना विवेक बनाए रखना। वह है अपने कर्तव्य से पीछे न हटना। वह है दूसरों की जिंदगी को अपनी चिंता से ऊपर रखना और सबसे बढ़कर वह है सही समय पर सही काम करने का साहस।
आज स्मित मछार स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। हम उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हमारी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं और अगर कॉमिक्स बाइट जैसे मंच पर हम सुपरहीरोज़ की कहानियाँ सुनाते हैं, तो हमें ऐसी वास्तविक कहानियों को भी सामने लाना चाहिए।
क्योंकि बच्चों को केवल यह जानना जरूरी नहीं है कि सुपरमैन कौन है।
उन्हें यह भी जानना चाहिए कि साहस क्या होता है। कर्तव्य क्या होता है। पराक्रम क्या होता है। और किसी दूसरे इंसान की जिंदगी बचाने के लिए अपने डर से ऊपर उठना क्या होता है।
शायद इसी वजह से आज कॉमिक्स बाइट पर हम यह कह सकते हैं:
सुपरहीरो हमेशा कॉमिक्स में नहीं होते।
कभी-कभी वे हवाई जहाज के कॉकपिट में होते हैं।
कभी वे हमारे आसपास होते हैं।
और कभी उनका नाम होता है….
कैप्टन स्मित मछार।“
कॉमिक्स बाइट की ओर से आपको दिल से सलाम।
जल्दी स्वस्थ होकर लौटिए, स्मित।
जय हिंद। जय भारत।

